रामचंद्र जी हनुमान जी को अच्छे और बुरे व्यक्तियों की पहचान कराते हैं रामायण केउत्तरकांड का दोहा
झूठेइ लेना झूठेइ देना झूठइ ही भोजन झूठ चबेना बोलाहिं मधुर बचन जिमी मोरा खाई महा अहि हदय कटोरा अर्थात 🚩उसका झूठ ही लेना और झूठा ही देना होता है झूठा ही भोजन होता है और झूठा ही चबेना होता है (अर्थात वे लेने देने के व्यवहार में झूठ का आश्रय लेकर दूसरों का हक मार लेते हैं अथवा झूठी डींगे हांका करते हैं कि हमने लाखों रुपए ले लिए करोड़ों का दान कर दिया इसी प्रकार खाते हैं चने की रोटी और कहते हैं कि आज खूब माल खाकर आए हैं )अथवा चबेना चबाकर रह जाते हैं और कहते हैं हमें बढ़िया भोजन से वैराग्य है इत्यादि मतलब यह कि वह सभी बातों में झूठ ही बोला करते हैं जैसे मोर बहुत मीठा बोलता है परंतु उसका हृदय ऐसा कठोर होता है कि वह महान विषैले सांपों को भी खा जाता है वैसे ही वह भी ऊपर से मीठे वचन बोलते हैं परंतु हदय के बहुत ही निर्दयी और कड़वे होते हैं संत श्री वेदान्त महाराज जी 9981293090
जय श्री महाकाल
ReplyDeleteJai guru dev
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